🌟 प्रेरणा स्रोत एवं मार्गदर्शक
💐 भावभीनी श्रद्धांजलि: श्री अश्विनी कुमार शर्मा जी
"सीधे-सज्जन-सौम्य-शिष्ट, सत्य-सरल-व्यवहार।
ऐसे गुरुवर आप थे, पंडित अश्विनी कुमार।।"
हिन्दी साहित्य के दैदीप्यमान नक्षत्र, शिक्षा-जगत के मूर्धन्य विद्वान, कर्मठ समाजसेवी एवं धर्मपरायण व्यक्तित्व श्री अश्विनी कुमार शर्मा जी का जन्म 15 अप्रैल, 1965 को बकसपुर (जिला-मुरैना, म.प्र.) के एक संभ्रांत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सुसंस्कारित परिवार में जन्म लेने के कारण आपको बाल्यकाल से ही धार्मिक एवं साहित्यिक संस्कार प्राप्त हुए। आपकी प्रारंभिक शिक्षा गुरुकुल पद्धति से हुई, जिसके परिणामस्वरूप आपके गुरु पं. देवव्रत जी शास्त्री के सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विचारों की आप पर गहरी छाप पड़ी। आपने संस्कृत, हिन्दी, अर्थशास्त्र एवं भूगोल में स्नातकोत्तर के साथ बी.एड. व एम.फिल. (संस्कृत साहित्य) की उपाधियाँ प्राप्त कीं।
आप एक आदर्श शिक्षक, महान शिक्षाविद, कुशल प्रबंधक, श्रेष्ठ साहित्यकार, प्रखर वक्ता एवं समर्पित समाजसेवी थे। वाग्देवी के वरद पुत्र श्री शर्मा जी की ख्याति पूरे क्षेत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कुशल मंच संचालक के रूप में भी थी। आपने वर्ष 1987-88 से शा.उ.मा.वि. तलेन और कालांतर में शा.उ.मा.वि. पचोर में शिक्षक के पद पर सेवाएं देते हुए शैक्षणिक जगत में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन किए।
आपकी ही पावन प्रेरणा और सहयोग से इस क्षेत्र में "संस्कारधानी" की परिकल्पना तैयार हुई और 'संस्कार Academy' नामक विद्यालय का बीजारोपण किया गया, जो आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में पल्लवित हो चुका है। इसके साथ ही आपने अनुभूति, धरती का मधुसंचय, गौरव, प्रदीपिका जैसी कई साहित्यिक कृतियों के संपादन का गुरुतर दायित्व भी निभाया।
नियति के क्रूर हाथों ने दिनांक 29 मार्च, 2013 को उन्हें हमसे असमय ही छीन लिया और वे ब्रह्म ज्योति में लीन हो गए। उनके जाने से शिक्षा और साहित्य जगत में एक अपूर्णीय क्षति हुई है।
आपकी पावन स्मृतियों को प्रणाम करते हुए संस्कार एकेडमी, पचोर आपको अश्रुपूरित श्रद्धांजलि एवं अपने श्रद्धासुमन समर्पित करता है। 🙏